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Taimur Ke Naam Par Macha Hai Bawal Aakhir Kaun Tha Ye Shaks

By Kanak Kumari
  • Dec 22, 2016
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पिछले दो दिनों से हर कोई बस एक नाम की ही चर्चा कर रहा है। वह नाम है तैमूर। दरअसल, यह नाम उस समय से चर्चा में है, जब बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान और करीना कपूर ने अपने बेटे का नामकरण किया तैमूर अली खान। अगर शाब्दिक अर्थ देखें तो अरबी भाषा के इस शब्द का अर्थ होता है लोहा। हालांकि, तैमूर नाम के साथ भारत का एक काला इतिहास जुड़ा हुआ है।


तैमूर का नाम दुनिया के क्रूरतम शासकों में शुमार रहा है। उसने अपने जीवनकाल में करीब 2 कोरड़ लोगों की हत्या करवाई। भारत में मुगल वंश की स्थापना करने वाला बाबर तैमूर का वंशज था। इतिहास के पन्नों को पलटते हुए हम यहां आपको तैमूर से जुड़ी जानकारियां प्रस्तुत कर रहे हैं।

 

क्रूर और कट्टर इस्लामिक शासक


तैमूर इतिहास में तैमूर लंग (8 अप्रैल 1336 – 18 फ़रवरी 1405) के नाम से प्रचलित है। वह तैमूरी राजवंश का संस्थापक था। उसकी गिनती संसार के निष्ठुर और कट्टर इस्लामिक विजेताओं में की जाती है। चंगेज खां से बेहद प्रभावित तैमूर अपनी शक्ति से संसार को रौंद डालना चाहता था। 1369 में उसने समरकंद के मंगोल शासक की मौत के बाद समरकंद पर कब्जा कर लिया। 1380 से 187 के बीच तैमूर ने खुरासान, सीस्तान, अफगानिस्तान, फारस, अजरबैजान और कुर्दीस्तान आदि पर आक्रमण कर उन्हें अधीन किया। 1393 में उसने बगदाद को लेकर मेसोपोटामिया पर आधिपत्य स्थापित किया।

 

लंगड़ा था तैमूर


तैमूर लंगड़ा था लेकिन उसकी क्रूरता में कोई कमी नहीं थी। तैमूर लंग का साम्राज्य वेस्‍टर्न एशिया से लेकर सेंट्रल एशिया होते हुए भारत तक फैला था। तैमूर ने अपनी सेना को आदेश दिया हुआ था कि जो भी उसे मिले उसे मार दिया जाए। तैमूर की सेना ने पुरुषों को मार दिया तो महिलाओं और बच्‍चों को बंदी बनाया।


 

भारत पर आक्रमण

 

लगातार विजय से उत्साहित तैमूर ने भारत पर नजर डाली। यहां आक्रमण का उसका मकसद इस्लाम का प्रसार करना था और भारत में प्रचलित मूर्तिपूजा का विध्वंस करना था। अप्रैल 1398 में तैमूर एक भारी सेना का नेतृत्व करते हुए समरकंद से भारत के लिए रवाना हुआ और सितंबर में उसने सिंधु, झेलम तथा रावी को पार किया।


मुल्तान पर कब्जा

 

तैमूर ने 13 अक्टूबर को वह मुल्तान पर हमला कर दिया। वहां से सैकड़ों निर्दोष नागरिकों का कत्ल कर दिया गया। बहुत लोगों को गुलाम बना लिया गया। अनेकों हिन्दू मंदिर नष्ट कर दिए गए।


 

पानीपत पर हमला

 

मुल्तान से आगे बढ़ने पर तैमूर का मुकाबला करने के लिए तुगलक सुल्तान महमूद अपने 40,000 पैदल 10,000 अश्वारोही और 120 हाथियों की एक विशाल सेना लेकर आया, लेकिन वह बुरी तरह पराजित हुआ।


दिल्ली में प्रवेश

 

इसके दूसरे ही दिन तैमूर ने अपनी सेना लेकर दिल्ली में प्रवेश कर लिया। उसने पांच दिनों पूरे शहर को लूटा। हजारों लोगों को कत्ल कर दिया और बंदी बना लिया गया। तैमूर ने महिलाओं और कारीगरों को अपना दास बना लिया। तैमूर को नर-मुंडों के बड़े-बड़े ढेर लगवाने में ख़ास मजा आता था। दिल्ली में उसने हजारों कटे सिरों को स्तूपों की शक्ल में जमा करवाया।


वापसी


15 दिन तक दिल्ली में रुकने के बाद वह स्वदेश रवाना हो गया। वापसी के दौरान भी तैमूर का कहर कम नहीं हुआ। उसने 9 जनवरी 1399 को मेरठ पर हमला कर दिया और जमकर लूटपाट की। सैकड़ों लोग कत्ल कर दिए गए। बाद में हरिद्वार होते हुए वह कांगड़ा पहुंचा और उस पर कब्जा कर लिया। इस दौरान उसने जम्मू पर भी चढ़ाई की और बाद में 19 मार्च 1399 को पुन: सिंधु नदी पार करते वह समरकंद लौट गया, जहां 1405 में उसकी मृत्यु हो गई।


भारत के इतिहास में तैमूर का नाम काले अक्षरों में लिखा है।

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