Genius Work

तो इस सफलता के पीछे इतनी मेहनत और संघर्ष है

By Rohit Varma
  • Sep 21, 2016
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आज दुनिया भर में फेसबुक एक ऐसा सोशल नेटवर्क बन चुका है, जिसके बिना हम अपनी दिनचर्या की कल्पना तक नहीं कर सकते हैं. फेसबुक ने हमें उनके साथ जोड़ दिया है, जो कभी हमसे बिछुड़ गए थे या जिन्हें हम जीवन की आपा-धापी में भुला चुके थे. लेकिन एक कमरे से शुरू हुआ फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग का ये सोशल नेटवर्क, रातों-रात नहीं चमका. इसके पीछे सालों की मेहनत और संघर्ष की कहानी है. आइए आज हम आपको 33 तस्वीरों के माध्यम से दिखाते हैं फेसबुक के फ़र्श से अर्श तक का सफ़र.

 

फेसबुक की शुरुआत हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के Kirkland House छात्रावास से हुई. 2003 में हार्वर्ड में कॉलेज के द्वितीय वर्ष के स्टूडेंट मार्क जुकरबर्ग ने 'Face mash' की शुरुआत की. ये एक ऐसा एप था, जिसमें उन्होंने अपने सहपाठियों की फ़ोटोज़ डाली थीं. इन फ़ोटोज़ को उन्होंने यूनिवर्सिटी छात्रावास प्रशासन की आईडी फाइल्स से ही ले लिया था. इस एप पर शुरुआत के चार घंटों में ही 450 लोगों के माध्यम से 22,000 लोग विजिट किए और ये देखते ही देखते चर्चा में आ गया. लेकिन कुछ दिनों के बाद हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने आदेश दिया कि इस एप को न चलाया जाए, क्योंकि ये कॉपीराइट और सुरक्षा से जुड़ा मामला है.

 

इसके लिए जुकरबर्ग को अनुशासनात्मक कार्यवाही का सामना भी करना पड़ा था, लेकिन हार्वर्ड ने उन्हें बाहर नहीं निकाला. इसके बाद 4 फरवरी, 2004 को जुकरबर्ग ने लॉन्च किया 'TheFacebook' को.

 

लॉन्चिंग के 6 दिनों बाद ही हार्वर्ड के तीन सीनियर्स, जुड़वे भाई Cameron Winklevoss, Tyler Winklevoss और दिव्या नरेन्द्र ने क्लेम किया कि उन्होंने जुकरबर्ग से HarvardConnection.com बनाने के लिए करार किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि जुकरबर्ग ने वो वेबसाइट न बनाकर, उनके आइडियाज़ को फेसबुक बनाने में इस्तेमाल किया.

 

वे इसके लिए क़ानून का सहारा लेना चाहते थे, लेकिन 2008 में ये मामला तब सुलझ गया, जब फेसबुक ने अपने 1.2 मिलियन शेयर उनको दे दिए. आपको बता दें कि एक माह के भीतर ही हार्वर्ड के आधे से ज्यादा छात्र Thefacebook के मेम्बर्स बन चुके थे. Thefacebook धीरे-धीरे Yale, Columbia और Stanford यूनिवर्सिटीज़ तक पहुंच चुका था. इसके बाद जुकरबर्ग हार्वर्ड के सहपाठी Dustin Moskovitz ( नीचे फोटो में बाईं तरफ), Eduardo Saverin, Andrew McCollum और Chris Hughes को सह-संस्थापक के रूप में अपने साथ ले आए, जिससे फेसबुक को आगे बढ़ाने में उनकी मदद ली जा सके.

 

फेसबुक को पहला विज्ञापन लॉन्चिंग के कुछ ही महीनों के भीतर मिल गया और इसने ये पक्का कर दिया कि फेसबुक तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि जुकरबर्ग के पास इसे चलाने के साधन सीमित ही थे. अभी तक फेसबुक को जुकरबर्ग अपने हॉस्टल के कमरे से ही चला रहे थे, लेकिन अब वक्त आ गया था कि फेसबुक के प्रति गंभीर हुआ जाए. इसलिए 2004 में जुकरबर्ग ने हार्वर्ड छोड़ दिया, कुछ उसी तरह जैसे बिल गेट्स ने कभी छोड़ा था.

 

2004 के मध्य में जुकरबर्ग ने Napster के सह-संस्थापक Sean Parker को अपनी कंपनी का पहला प्रेसिडेंट बनाया. लगभग उसी समय जून 2004 में जुकरबर्ग ने Palo Alto, California के एक छोटे से ऑफिस से फेसबुक का संचालन शुरू किया. जिस वक्त फेसबुक अपने नए ऑफिस में पहुंचा, उसी माह उसे पहली बाहरी फंडिंग 500,000 डॉलर की मिली. ये इन्वेस्टमेंट PayPal ने की थी. इसके बाद Tesla के संस्थापक Elon Musk ने इन्वेस्टमेंट की.

 

मई 2005 में फेसबुक की फंडिंग बढ़कर 13 .7 मिलियन डॉलर हो गई. 2007 के अंत में जुकरबर्ग गूगल की एक एक्जीक्यूटिव Sheryl Sandberg से एक क्रिसमस पार्टी के दौरान मिले. Sheryl Sandberg उस वक्त Washington Post को ज्वाइन करने वाली थीं. लेकिन उनसे मिलने के बाद जुकरबर्ग को लगा कि उसकी कंपनी को चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) की ज़रुरत है और उन्होंने इसके लिए Sheryl को 2008 की शुरुआत में मना लिया.

 

हालांकि फेसबुक का प्रसार तेजी से हो रहा था, लेकिन इसी बीच स्मार्टफोन के आने के बाद इसके प्रसार में और वृद्धि हुई. 2009 में फेसबुक को एक अपेक्षाकृत बड़े ऑफिस से संचालित किया जाने लगा. इसका पता था, Palo Alto office, Stanford Research Park. 2010 के अंत तक फेसबुक पर महीने में Trillion यूज़र्स आने लगे.

 

2011 में फेसबुक का ऑफिस एक बड़े कॉर्पोरेट कैम्पस से संचालित होने लगा. जुकरबर्ग की फिलॉसफी 'Move Fast and Break Things' को अपनाते हुए इस कैम्पस के मुख्य रास्ते को 'Hacker Way'नाम दिया गया. फेसबुक ने दुनिया के कई हिस्सों में हुए कई बड़े आंदोलनों में लोगों को जुटाने में मुख्य भूमिका निभाई. दूसरी तरफ फेसबुक को दुनिया भर के लोगों तक पहुंचाने के लिए जुकरबर्ग ने विश्व के बड़े और प्रभावशाली नेताओं से मुलाकात भी की.

 

आज फेसबुक के लिए लोगों का पागलपन रुकने का नाम नहीं ले रहा. फेसबुक का सफ़र जारी रहा.  2012 में फेसबुक के सभी कर्मचारियों को Little Red Book भेंट की गई. इसमें स्लोगन के माध्यम से ये दिखाया गया कि सभी कर्मचारी एक ही पेज पर हैं. आखिरकार जुकरबर्ग को Priscilla Chan के साथ अपने सालों पुराने सम्बन्ध को शादी में बदलने का मौका मिला. Priscilla Chan से वो तब मिले, जब वो हार्वर्ड में पढ़ती थीं.

 

फेसबुक ने सफलता का सफ़र जारी रखते हुए Istagram की शुरुआत की, जो काफी सफल रहा.  इसके बाद फेसबुक ने WhatsApp को भी खरीद लिया.  तेजी से बढ़ती इस कंपनी ने अपने ऑफिस को फिर से बड़ा किया.  इसे महान आर्किटेक्ट Frank Gehry ने डिज़ाइन किया है. दिसंबर 2015 में जुकरबर्ग ने Chan Zuckerberg Initiative की घोषणा की.

 

जो दुनिया को बेहतर बनाने में जुकरबर्ग के 99% धन का इस्तेमाल करेगी. दुनिया की भलाई के लिए काम करने के साथ ही जुकरबर्ग ने कंपनी के काम पर पूरी पकड़ बना रखी है.  आख़िरकार ये वो कंपनी है, जिसकी शुरुआत उन्होंने हॉस्टल के कमरे में बैठकर की थी.  मार्क जुकरबर्ग की सफलता ये सफ़र कैसा लगा, हमें कमेन्ट करके ज़रूर बताइए. साथ ही इसे शेयर करिए, जिससे दूसरे लोग भी प्रेरणा पा सकें.

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