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इस शख्स के कारण हुए 500 और 1000 के नोट को प्रतिबंधित

By Parul Sharma
  • Nov 10, 2016
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काले धन पर रोक लगाने के लिए पीएम मोदी ने अहम फैसला लेते हुए मंगलवार की शाम से 500 और 1000 के नोटों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। जहां एक ओर देशभर के लोग मोदी सरकार द्वारा 500 और 1000 रुपए के नोट बंद किए जाने को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग यह भी जानना चाहते हैं कि आखिर पीएम मोदी को नोट बदलने की युक्ति किसने सुझाई।


तो चलिए आज हम आपको मिलवाते हैं पेशे से एक इंजीनियर अनिल बोकिल से जिनको इस एतिहासिक फैसले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। हालांकि, पीएम मोदी ने इनका प्रस्ताव सुनने के लिए सिर्फ 9 मिनट का ही समय दिया गया था।

 

आइये जानते है कौन है ये अनिल बोकिल

 

अनिल बोकिल पेशे से पुणे (महाराष्ट्र) के एक इंजीनियर है और यह ‘अर्थक्रांति संस्थान’ के एक बहुत ही मुख्य सदस्य है। आपको बता दे कि, अनिल बोकिल वर्ष 2014 में चुनाव से पहले ही नरेंद्र मोदी से मिल चुके थे, और उस समय ही उन्हें मुलाकात के लिए सिर्फ 9 मिनट का समय दिया गया था। लेकिन जब वह भ्रष्टाचार और नकली रुपयों को रोकने के लिए अपना प्रस्ताव सुनाने लगे तो, नरेंद्र मोदी ने उनका यह प्रस्ताव 2 घंटों तक सुना था।

 

उनका यह अर्थक्रांति संस्थान महाराष्ट्र के पुणे में है, जो एक इकोनॉमिक एडवाइजरी बॉडी की तरह काम करता है। इस संस्थान में चार्टर्ट अकाउंटेट और इंजीनियर सदस्य काम करते हैं। इस संस्थान ने दावा किया है कि यह प्रस्ताव ब्लैकमनी, मंहगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, रिश्वतखोरी, आतंकियों की फंडिंग रोकने में पूरी तरह कारगर होगा।

 


और कौन से थे सुझाव

 


अनिल बोकिल की संस्था ने पीएम मोदी को दिए अपने प्रपोजल में कहा था कि-


1. 100, 500 और 100 रुपए के नोट वापस लिए जाएं।


2. इंपोर्ट ड्यूटी को छोड़कर 56 तरह के टैक्स वापस लेने चाहिए।


3. सभी तरह के बड़े ट्रांजेक्शन सिर्फ बैंक चेक, डीडी और ऑनलाइन के जरिए ही होने चाहिए।


4. कैश ट्रांजेक्शन करने के लिए लिमिट तय करनी होगी. इन पर कोई टैक्स न लगाया जाए।


5. सरकार के रेवेन्यू जमा करने का एक ही बैंक सिस्टम हो. क्रेडिट अमाउंट पर बैंकिंग ट्रांजेक्शन टैक्स (2 से 0.7%) लगाया जाए।


राहुल गांधी से भी की थी मुलाकात


संस्था का दावा है कि पीएम मोदी से मिलने से पहले ये लोग राहुल गांधी से भी मुलाकात कर चुके हैं लेकिन राहुल गांधी ने महज दस पंद्रह सेकंड ही बात की और बात नहीं बनी। इसके बाद संस्था के लोगों को वापस लौटना पड़ा था।

 

हालांकि, ये फैसला लेना बहुत ही मुश्किल और चुनौतियों से भरा हुआ था, लेकिन पीएम मोदी ने सब कुछ सम्भालते हुए इस प्रस्ताव को पास कर दिया है ।

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